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Saturday, 6 May 2017

छोटी सोच




6 दिसंबर 2012 को मानवता को शर्मसार करते हुए एक घटना होती है,एक लड़की जिसका निर्ममता के साथ रेप किया जाता है वो अलग,नारी अस्तित्व की हत्या करते हुए,नीचता की सारी हदों को लांघ कर एक लड़की के अस्तित्व का मख़ौल बना दिया जाता है।
और यह करने वाले लोग मंगल ग्रह से नही आये,बल्कि हमारे आपके बीच के लोग है।
इतना सबकुछ होने के बाद भी उनको बचाने के लिए वकील भी मिल जाता है और तो और 6-7 साल ऐश से बीतने के समय भी मिल जाता है,ऐसा सिर्फ इसलिए क्यों कि अपना कानून आवश्यकता से अधिक लचीला है।

अभी भी कुछ intellectual ज्ञान रेल रहे है,की लड़की को रात में घूमना नही चाहिए,जीन्स नही पहनना चाहिए,अरे साब वो इंसान नही है क्या??
और अगर ऐसा करने से वो सुरक्षित है तो एक मिनट के लिए मान भी लेते है पर 2-3 साल की बच्ची का रेप करने वाले लोग भी यही सोसाइटी में पड़े हुए है।

अब वक्त है समझने का की समस्या लड़कियों के पहनावे में नही है तुम्हारी सोच में है, इस सोच को समाज तभी बदल सकती है जब बच्चे के पैदा होने से लेकर उसे बड़े होने तक परवरिश करते वक़्त उसकी माँ और बहन हमेशा सिखाए की एक औरत एक नारी की गरिमा क्या होती है,कभी एक औरत की अस्मिता के साथ छेड़छाड़ नही किया जाना चाहिए,वरना काल को तुम्हारी बहन और माँ के साथ भी वही होगा।

ऐसे लोगो के लिए कोई human rights नही होने चाहिए
और ऐसे लोगो को सपोर्ट करने और इनकी सोच रखने वाले टुच्चे सनकियों को ऐसी जगह भेजना चाहिए जहां इन्हें आजादी की कीमत पता चले।
इनके लिए अलग जेल या काल कोठरी बनानी चाहिए।

अगर आप हमारे विचारों से सहमत है तो comment में जरूर बताएं,इस से हमे हौसला मिलता है।

🙂 Vande mataram

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