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Thursday, 13 April 2017

The Younsters should Read this article.

आलोक कुमार पिछले कई दिनों से परेशान हैं।
आत्मविस्वास भी डगमगाया हुआ है।खुद उन्हें भी इस बात का एहसास है कि वे कुछ नया नही कर पा रहे हैं।
सीनियर्स का सवाल उठाना उन्हें गुस्सा तो दिलाता है,पर जब वे खुद ठंडे दिमाग से सोचते हैं,तो उन्हें भी लगता है कि फिलहाल अपने प्रोफेसन के साथ वे न्याय नही कर पा रहे है।
हालांकि वे सक्षम हैं और समझ भी बेहतर है,पर समझ नही पा रहे कि आखिर आगे बढ़कर चीजों को क्यों नही संभाल पा रहे है ?
क्या वे बदलते वक्त के साथ खुद को ढाल नही पा रहे है या फिर कम्फर्ट जोन में रहकर टाइम पास करने की आदत के शिकार हो गए है ?

सचेत होना जरूरी

ऐसी स्थिति तमाम कामकाजी लोगों के साथ आती है,पर अधिकतर तह में जाकर कारणों की तलाश नहीं करना चाहते।नतीजा आफिस से लेकर घर तक मे हैरान-परेशान रहते हैं। अगर ऐसी स्थिति आपके साथ भी है,तो समय रहते सचेत हो जाइए ।
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वापस पाएं अपना भरोसा

अगर आप अपने नियमित कार्य को भी ठीक से नही कर रहे पा रहे या कुछ नया नही कर पा रहे है तो फिर एकाग्र होकर सोचने की जरूरत है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है ?
इसके लिए नियमित रूप से कुछ ऐसा पढ़ें,ऐसा करें,जो रिलैक्स करने के साथ-साथ आत्मविस्वास का संचार भी कर सके।

सही दिशा में पहल

अगर आपको लगता है कि आप किसी भी काम को करने में सक्षम हैं,तो किसी की तुलना करने या निर्देश का इंतेजार करने की बजाए खुद पहल करके उसे पूरा करें ।
काम को मुकम्मल तरीके से पूरा करें।

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-- वंदे मातरम--
 

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